एक दफा बोल पड़े थे वो
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बड़े फक्र से एक दफा बोल पड़े थे वो,बेटियाँ हैं वो मेरी
उन्हे प्यार करने के लिए बस यही वजह काफी है

मुझे खुद के लिए दुआं करने की भी जरूरत नहीं
जानता हूँ बेटियाँ हैं वो हर दुआओं में मेरी सलामती मांगती हैं

वो जो बड़े मजबूत हैं थोड़े कमजोर हैं लाड जताने में
यूहीं बोल पड़े थे एक दफा सोचता हूँ-कभी आँगन में बैठ साथ खूब गुफ्तगू करूँ उनके, जाने कब बेटियाँ आँगन से विदा ले लें

यूहीं बोल पड़े थे वो एक दफा- धैर्य सीखा है बेटियों ने मुझसे पर उनकी हर तक़लीफ मुझे अधीर कर देती है

जानता हूँ बेटियाँ हैं वो जब तक  जख्म गहरा ना होगा
मुस्कान फीकी नहीं होगी यूहीं बोल पड़े थे एक दफा वो

उन पर नाज़ करने के लिए मुझे उन के ऊंचे ओहदे की जरूरत नहीं बस उन के पिता होने का मान ही काफी है
बड़े फक्र से एक दफा बोल पड़े थे वो।

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